Antibiotics का Overuse: एक ऐसी गलती जो भविष्य में सामान्य संक्रमण का इलाज भी मुश्किल बना सकती है
कल्पना कीजिए…
एक मरीज को गंभीर pneumonia हुआ। डॉक्टरों ने जांच कराई और पता लगाया कि संक्रमण किस bacteria की वजह से है। इसके बाद Antibiotic Sensitivity Test किया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन-सी antibiotic उस bacteria पर प्रभावी हो सकती है।
लेकिन रिपोर्ट ने डॉक्टरों को चिंतित कर दिया।
जिस bacteria ने infection पैदा किया था, वह कई उपलब्ध antibiotics के प्रति resistant पाया गया। ऐसे मामलों में डॉक्टरों के पास इलाज के विकल्प बहुत सीमित हो सकते हैं।
यही है Antimicrobial Resistance (AMR) की गंभीरता।
जब bacteria उन antibiotics के प्रति resistant हो जाते हैं जो पहले उन्हें नियंत्रित या खत्म कर सकती थीं, तो संक्रमण का इलाज कठिन हो सकता है। अत्यधिक resistant bacteria को आम भाषा में कई बार “Superbug” कहा जाता है। WHO के अनुसार antimicrobial resistance संक्रमण को difficult या कभी-कभी impossible-to-treat बना सकती है और बीमारी के फैलने, गंभीर complications तथा मृत्यु का जोखिम बढ़ा सकती है।
आखिर Antibiotic Resistance पैदा कैसे होती है?
सबसे पहले एक जरूरी बात समझिए:
Antibiotics bacteria को target करती हैं, लेकिन Antibiotic Resistance bacteria में विकसित होती है।
जब antibiotics का गलत या अनावश्यक इस्तेमाल होता है, तो bacteria पर ऐसा evolutionary pressure पड़ता है जिसमें resistant bacteria के survive करने और आगे फैलने की संभावना बढ़ जाती है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब कोई व्यक्ति:
- वायरल सर्दी-जुकाम में antibiotic ले लेता है
- बिना डॉक्टर की सलाह antibiotic खरीद लेता है
- पिछली बीमारी की बची हुई antibiotic दोबारा लेता है
- किसी दूसरे व्यक्ति की prescription देखकर वही दवा लेता है
- गलत antibiotic या गलत dose इस्तेमाल करता है
- डॉक्टर द्वारा निर्धारित course को अपनी मर्जी से बदल देता है
- बार-बार antibiotics का इस्तेमाल करता है

WHO के अनुसार antimicrobial resistance के प्रमुख drivers में antimicrobial medicines का misuse और overuse शामिल हैं।
“सर्दी हुई तो Antibiotic ले लो”—यही सोच खतरनाक हो सकती है
भारत में अक्सर हल्का बुखार, गले में दर्द, सर्दी, खांसी या दस्त होने पर लोग खुद से antibiotic लेने लगते हैं। कई बार medical store से पुरानी दवा का नाम बताकर वही antibiotic फिर खरीद ली जाती है, लेकिन हर infection bacterial नहीं होता।
कई respiratory infections viral हो सकते हैं। ऐसे मामलों में antibiotic virus को खत्म नहीं करती, यानी अगर बीमारी bacterial नहीं है, तो antibiotic लेने से फायदा जरूरी नहीं है—लेकिन antibiotic exposure फिर भी हो सकता है।
भारत के National Action Plan on AMR documents में भी viral illnesses, upper respiratory tract infections और diarrhoea जैसी स्थितियों में antibiotics के inappropriate prescribing और use की समस्या को महत्वपूर्ण concern माना गया है।
Ofloxacin, Azithromycin, Amoxicillin या कोई भी Antibiotic “सामान्य दवा” नहीं है
कई लोगों के लिए antibiotic का मतलब बस “infection की दवा” होता है। लेकिन हर antibiotic की अपनी indication, spectrum, dose, duration, contraindications और संभावित adverse effects होते हैं।
उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति ने पिछली बार किसी infection में Azithromycin ली थी, इसका मतलब यह नहीं कि अगली बार गले में दर्द होने पर वही antibiotic सही होगी। इसी तरह किसी और को फायदा हुई Amoxicillin आपके infection के लिए जरूरी नहीं कि सही हो।
Antibiotic का चुनाव infection के संभावित कारण, मरीज की स्थिति, medical history, स्थानीय resistance patterns और जरूरत पड़ने पर laboratory testing के आधार पर किया जाता है।
Antibiotic Sensitivity Test क्या होता है?
जब किसी गंभीर bacterial infection में bacteria की पहचान हो जाती है, तो डॉक्टर कुछ मामलों में Antimicrobial Susceptibility Testing (AST) या antibiotic sensitivity testing का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसका उद्देश्य यह समझना होता है कि isolated bacteria किन antibiotics के प्रति susceptible है और किनके प्रति resistant। यह जानकारी डॉक्टर को अधिक उपयुक्त treatment चुनने में मदद कर सकती है। लेकिन हर infection में हर बार culture या sensitivity test जरूरी हो, ऐसा नहीं है। इसका निर्णय डॉक्टर clinical situation के आधार पर करते हैं।
Superbug क्या होता है?
“Superbug” कोई एक specific bacteria का नाम नहीं है।
यह आम तौर पर ऐसे microorganisms के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जिनमें कई महत्वपूर्ण antimicrobial medicines के खिलाफ resistance होती है। ऐसे bacteria से होने वाले infections में treatment options सीमित हो सकते हैं, और यही कारण है कि Antibiotic Resistance सिर्फ एक व्यक्ति की समस्या नहीं है।

अगर resistant bacteria किसी व्यक्ति में मौजूद हैं, तो वे दूसरे लोगों तक भी फैल सकते हैं, WHO के अनुसार AMR resistant infections को फैलने योग्य बनाती है और health systems पर अतिरिक्त बोझ डालती है।
क्या भारत में Antibiotics की बिक्री पर कोई कानून नहीं है?
यहां एक महत्वपूर्ण correction जरूरी है।
यह कहना सही नहीं है कि भारत में antibiotics के लिए “कोई rules and regulations नहीं हैं।”
भारत में drug regulation मौजूद है। कई prescription medicines Schedule H और Schedule H1 के अंतर्गत regulated हैं। CDSCO के records में Schedule H/H1/C/X से संबंधित regulatory notices मौजूद हैं और Schedule H1 को Drugs and Cosmetics Rules में शामिल किया गया था।
भारत की National Action Plan on AMR में भी antimicrobial medicines की regulated access, OTC sale को रोकने के regulatory enforcement और high-end antimicrobials की categorization को मजबूत करने की जरूरत को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
इसलिए असली सवाल केवल “क्या कानून है?” नहीं है।
सवाल यह भी है:
क्या नियमों का पालन हर स्तर पर प्रभावी तरीके से हो रहा है?
यही वह जगह है जहां healthcare professionals, pharmacies, regulators और patients—सभी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
Meropenem जैसी “Reserve” Antibiotic को लेकर इतनी चिंता क्यों?
हर antibiotic को एक ही स्तर की सामान्य दवा नहीं माना जाता।
WHO की AWaRe classification antibiotics को broadly Access, Watch और Reserve categories में रखती है।
Access antibiotics आम infections में first- या second-choice treatment के रूप में अधिक इस्तेमाल की जाती हैं।
Watch antibiotics में resistance का risk अधिक concern हो सकता है और इनका उपयोग अधिक सावधानी से किया जाना चाहिए।
Reserve antibiotics आम तौर पर multidrug-resistant infections जैसी गंभीर परिस्थितियों में last-resort options के रूप में सुरक्षित रखी जाती हैं।
इसलिए ऐसी antibiotics का बिना उचित medical indication इस्तेमाल करना भविष्य के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
Antibiotic Resistance केवल मरीज की गलती नहीं है
यह समझना भी जरूरी है कि AMR के लिए सिर्फ मरीज को दोष देना सही नहीं होगा।
इसके पीछे कई interconnected factors हो सकते हैं:
1. Self-medication
बिना medical evaluation antibiotic लेना।
2. गलत diagnosis
यह मान लेना कि हर fever या cough bacterial infection है।
3. Inappropriate prescribing
जब antibiotic की clinical जरूरत नहीं होती, फिर भी prescribe कर दी जाती है।
4. गलत antibiotic selection
ऐसी antibiotic का इस्तेमाल जो उस bacteria के खिलाफ प्रभावी नहीं है।
5. गलत dose या duration
दवा को डॉक्टर की सलाह के अनुसार न लेना।
6. Infection prevention की कमी
Hand hygiene, vaccination, sanitation और infection-control measures की कमी भी resistant infections के फैलाव में भूमिका निभा सकती है।
WHO के अनुसार AMR को बढ़ाने वाले factors में inappropriate antibiotic use के साथ-साथ infection prevention की कमियां, inadequate sanitation, vaccination और diagnostics तक सीमित access जैसे factors भी शामिल हैं।
“Antibiotic बंद कर दी क्योंकि अब ठीक हूं”—क्या यह सही है?
यहां भी एक common misconception है।

Antibiotic की अवधि डॉक्टर द्वारा निर्धारित होती है। मरीज को खुद से यह तय नहीं करना चाहिए कि दवा कब बंद करनी है या कितने दिन बढ़ानी है। यदि दवा से side effect हो रहा है, बीमारी बेहतर नहीं हो रही या कोई नई समस्या सामने आ रही है, तो prescribing doctor से संपर्क करना चाहिए।
Antibiotic का course अपनी मर्जी से बदलना उचित नहीं है।
क्या Antibiotics शरीर की Immunity खत्म कर देती हैं?
यह कहना कि antibiotics सीधे आपकी “immunity खत्म कर देती हैं”, वैज्ञानिक रूप से बहुत oversimplified statement होगा।
Antibiotics का मुख्य उद्देश्य bacterial infections का उपचार करना है। लेकिन उनका unnecessary या inappropriate इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है, जिसमें adverse effects और microbiome पर असर जैसे concerns शामिल हो सकते हैं, इसलिए Superbugs से बचने का समाधान केवल “immunity बढ़ाना” नहीं है।
सबसे महत्वपूर्ण उपाय है:
सही diagnosis + सही antibiotic + सही dose + सही duration + infection prevention.
WHO भी antimicrobial stewardship यानी antibiotics को जरूरत और सही clinical indication के अनुसार इस्तेमाल करने पर जोर देता है।
भारत में स्थिति कितनी गंभीर है?
भारत में AMR को लेकर सरकार और health agencies लंबे समय से surveillance, awareness, infection prevention और antimicrobial stewardship पर काम कर रहे हैं। भारत का नया National Action Plan on Antimicrobial Resistance (NAP-AMR) 2025–2029 भी AMR containment के लिए national framework प्रदान करता है।
WHO India भी AMR surveillance, antimicrobial consumption, infection prevention और appropriate antimicrobial use जैसे क्षेत्रों में भारत के प्रयासों को support करता है।
इससे स्पष्ट है कि समस्या को सरकार और healthcare system गंभीरता से ले रहे हैं, लेकिन AMR को नियंत्रित करने के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। एक prescription और एक antibiotic के बीच patient की awareness भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
Antibiotic Resistance से बचने के लिए आम व्यक्ति क्या करे?
1. बिना डॉक्टर की सलाह antibiotic न लें
Medical store से खुद से antibiotic खरीदकर शुरू न करें।
2. बची हुई पुरानी antibiotic दोबारा न लें
हर बार infection का कारण अलग हो सकता है।
3. किसी दूसरे व्यक्ति की prescription copy न करें
एक ही symptom का मतलब एक ही बीमारी नहीं होता।
4. Antibiotic किसी के साथ share न करें
आपके लिए prescribed medicine किसी दूसरे व्यक्ति के लिए सही नहीं हो सकती।
5. Doctor से पूछें कि antibiotic की जरूरत क्यों है
अगर doctor antibiotic prescribe करते हैं, तो indication और prescribed duration को समझना उपयोगी है।
6. Viral infection में antibiotic की जरूरत हमेशा नहीं होती
सर्दी-जुकाम या अन्य viral illnesses में antibiotic अक्सर उपयोगी नहीं होती।
7. Vaccination और hygiene को गंभीरता से लें
Infections को रोकना antibiotic की जरूरत कम करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
8. गंभीर infection में डॉक्टर की सलाह और testing को नजरअंदाज न करें
कुछ परिस्थितियों में culture और susceptibility testing treatment को guide करने में मदद कर सकती है।
सबसे खतरनाक बात क्या है?
सबसे खतरनाक बात यह नहीं है कि आज कोई antibiotic काम नहीं कर रही, अगर resistance लगातार बढ़ती रही, तो भविष्य में ऐसे infections बढ़ सकते हैं जिनके इलाज के विकल्प बहुत सीमित होंगे।
WHO के अनुसार 2023 में दुनिया भर में laboratory-confirmed bacterial infections में लगभग हर छह में से एक infection antibiotic-resistant था। WHO ने 2018 से 2023 के बीच निगरानी किए गए कई pathogen-antibiotic combinations में resistance बढ़ने की भी रिपोर्ट की है।
इसलिए Antibiotic Resistance को “भविष्य की बीमारी” समझना गलती होगी।
यह आज की समस्या है।
निष्कर्ष: Antibiotic को दुश्मन नहीं, जिम्मेदारी समझिए
Antibiotics आधुनिक चिकित्सा की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक हैं।
Pneumonia, sepsis, urinary infections और कई गंभीर bacterial infections में इनकी भूमिका जीवन बचाने वाली हो सकती है, लेकिन antibiotic जितनी महत्वपूर्ण है, उसका सही इस्तेमाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जब जरूरत न होने पर antibiotic ली जाती है, गलत antibiotic चुनी जाती है या बिना medical guidance के इसका इस्तेमाल किया जाता है, तो हम केवल अपनी समस्या का इलाज नहीं कर रहे होते—हम antibiotic resistance की बड़ी समस्या में भी योगदान दे सकते हैं।
आज एक simple rule याद रखिए:
“हर बुखार में Antibiotic नहीं, हर infection में Antibiotic नहीं और हर Antibiotic हर Bacteria पर काम नहीं करती।”
अगर डॉक्टर antibiotic prescribe करें तो उसे उनकी सलाह के अनुसार लें।
अगर antibiotic की जरूरत नहीं है, तो सिर्फ “कुछ मजबूत दवा” लेने के लिए antibiotic की मांग न करें।
क्योंकि सवाल सिर्फ आज के infection का नहीं है।
सवाल यह है कि कल जरूरत पड़ने पर हमारे पास असरदार Antibiotic बचेगी या नहीं।