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क्या आयुर्वेद और योग फिर से शांत मन वाला समाज बना सकते हैं?

Rishi K Sharma
June 21, 2026
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क्या आयुर्वेद और योग फिर से शांत मन वाला समाज बना सकते हैं?

क्या आयुर्वेद और योग फिर से शांत मन वाला समाज बना सकते हैं? पित्त, रजोगुण, सात्विक जीवन और युवाओं को बचाने की दिशा

"दुनिया को तेज दिमाग नहीं, शांत मन की जरूरत है।"

अगर हम ईमानदारी से देखें, तो समस्या केवल मोबाइल, सोशल मीडिया, नशे या आधुनिक जीवन की नहीं है। समस्या यह है कि इंसान बाहर से जितना आधुनिक हुआ है, अंदर से उतना ही अस्थिर होता जा रहा है। हमारे घर बड़े हो गए, लेकिन दिल छोटे होते जा रहे हैं।

सुविधाएँ बढ़ गईं, लेकिन सहनशीलता कम होती जा रही है।

ज्ञान बढ़ गया, लेकिन बुद्धि और विवेक कमजोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं।

शायद इसीलिए आज पूरी दुनिया में मानसिक तनाव, अवसाद, अकेलापन, गुस्सा और रिश्तों में टूटन बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में आयुर्वेद हमें केवल दवाइयाँ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाता है।

आयुर्वेद में मन और शरीर अलग नहीं हैं

आधुनिक विज्ञान आज जिस "Mind-Body Connection" की बात करता है, आयुर्वेद हजारों साल पहले से उसे स्वीकार करता आया है।

  • आयुर्वेद के अनुसार शरीर और मन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
  • यदि भोजन खराब होगा, तो मन भी प्रभावित होगा।
  • यदि नींद खराब होगी, तो स्वभाव भी बदल सकता है।
  • यदि विचार नकारात्मक होंगे, तो शरीर भी रोगों की ओर बढ़ सकता है।

इसलिए आयुर्वेद केवल रोग को नहीं, बल्कि पूरे व्यक्ति को देखता है।

आखिर गुस्सा कहाँ से पैदा होता है?

आयुर्वेद के अनुसार क्रोध का संबंध मुख्य रूप से पित्त दोष और रजोगुण की वृद्धि से माना जाता है।

जब पित्त बढ़ता है, तो व्यक्ति में ये परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं—

  • जल्दी गुस्सा आना।

  • छोटी बात पर प्रतिक्रिया देना।

  • अधीरता।

  • चिड़चिड़ापन।

  • कम नींद आना।

  • बेचैनी।

  • दूसरों की गलतियाँ जल्दी दिखाई देना।

  • हर समय तनाव महसूस होना।

वहीं रजोगुण की अधिकता मन को हमेशा सक्रिय और अशांत बनाए रखती है।

  • मन हर समय कुछ चाहता है।
  • कुछ पाने की जल्दी।
  • कुछ बनने की जल्दी।
  • कुछ दिखाने की जल्दी।

और जब इच्छाएँ पूरी नहीं होतीं, तो वही बेचैनी धीरे-धीरे गुस्से का रूप लेने लगती है।

सात्विक भोजन केवल पेट नहीं, मन को भी पोषण देता है

आज हम कैलोरी गिन रहे हैं, लेकिन मन की गुणवत्ता भूल गए हैं।

आयुर्वेद कहता है कि भोजन केवल शरीर नहीं बनाता, वह मन का भी निर्माण करता है।

आज के समय में हमें फिर से इन चीजों की ओर लौटने की आवश्यकता है—

  • घर का ताजा भोजन।

  • मौसमी फल।

  • पर्याप्त पानी।

  • शुद्ध घी की उचित मात्रा।

  • दालें और साबुत अनाज।

  • समय पर भोजन।

  • रात को हल्का भोजन।

  • अधिक तला, पैकेज्ड और अत्यधिक चीनी वाले पदार्थों से दूरी।

यह केवल शरीर के लिए नहीं, मानसिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

योग केवल शरीर मोड़ने का नाम नहीं है

आज योग को कई लोग केवल वजन कम करने या फिटनेस तक सीमित मानते हैं।

लेकिन योग का वास्तविक उद्देश्य मन को स्थिर करना है।

योग हमें धीरे चलना सिखाता है, शांत रहना सिखाता है।

खुद से जुड़ना सिखाता है और शायद आज की दुनिया को सबसे ज्यादा इसी की जरूरत है।

कुछ आसान योगासन जो मन को शांति दे सकते हैं

- बालासन

यह तनाव कम करने और मन को शांत करने में सहायक माना जाता है।

- वज्रासन

भोजन के बाद बैठने का सरल आसन, जो पाचन और स्थिरता दोनों में लाभदायक माना जाता है।

- पश्चिमोत्तानासन

शरीर और मन दोनों को आराम देने वाला आसन।

- शवासन

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद सबसे जरूरी आसन।

जहाँ शरीर ही नहीं, मन भी विश्राम करना सीखता है।

प्राणायाम – जब सांसें ही दवा बन जाएँ

हम पूरे दिन मोबाइल चार्ज करते हैं, लेकिन अपने मन को चार्ज करना भूल जाते हैं।

प्राणायाम मन को फिर से संतुलित करने का एक सरल माध्यम है।

- अनुलोम-विलोम

मन को शांत करने और तनाव कम करने में सहायक माना जाता है।

- भ्रामरी प्राणायाम

मानसिक बेचैनी और चिड़चिड़ेपन में लाभकारी माना जाता है।

- नाड़ी शोधन

मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक।

केवल 10-15 मिनट का नियमित अभ्यास भी व्यक्ति को अपने भीतर के शोर को सुनना सिखा सकता है।

युवाओं को कैसे बचाया जाए?

  • युवाओं को भाषणों की नहीं, समझ की जरूरत है।
  • उन्हें जज करने की नहीं, सुनने की जरूरत है।
  • उन्हें तुलना की नहीं, विश्वास की जरूरत है।
  • उन्हें केवल करियर नहीं, जीवन जीना भी सिखाना होगा।
  • हमें अपने बच्चों से केवल यह नहीं पूछना चाहिए—
  • "कितने नंबर आए?"

बल्कि कभी-कभी यह भी पूछना चाहिए—

  • "तू खुश है ना?"
  • "किसी बात की चिंता तो नहीं?"
  • "अगर कोई परेशानी है, तो मैं तेरे साथ हूँ।"
  • शायद कई बच्चे केवल यह सुनना चाहते हैं—
  • "बेटा, फेल हो जाएगा तो भी हमारा ही रहेगा।"

माता-पिता के लिए कुछ जरूरी बातें

  • बच्चों के सामने हर समय मोबाइल में न रहें।
  • दिन में कम से कम एक बार पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन करे।
  • बच्चों को प्रकृति से जोड़ें।
  • उन्हें खेलने दें।
  • हर समय तुलना न करें।
  • उनकी बातों को हल्के में न लें।
  • उनकी भावनाओं का सम्मान करें।

क्योंकि हर जिद्दी बच्चा बिगड़ा हुआ नहीं होता।

कई बार वह केवल ध्यान चाहता है।

समाज को क्या बदलना होगा?

  • हमें सफलता की परिभाषा बदलनी होगी।
  • केवल पैसा ही सफलता नहीं है।
  • केवल बड़ी गाड़ी ही सफलता नहीं है।
  • केवल फॉलोअर्स ही सफलता नहीं हैं।
  • अगर इंसान करोड़पति है, लेकिन रात को चैन से सो नहीं पाता...
  • अगर उसके पास सब कुछ है, लेकिन परिवार नहीं है...
  • अगर वह बाहर से मुस्कुरा रहा है, लेकिन भीतर से टूट चुका है...

तो क्या सच में वह सफल है?

नई पीढ़ी खराब नहीं है, केवल थकी हुई है

  • GEN Z खराब नहीं है।
  • वे संवेदनशील हैं।
  • तेज हैं।
  • रचनात्मक हैं।

लेकिन वे बहुत अधिक सूचना, तुलना और अपेक्षाओं के बीच जी रहे हैं।

  • उन्हें आलोचना नहीं, मार्गदर्शन चाहिए।
  • उन्हें डर नहीं, विश्वास चाहिए।
  • उन्हें उपदेश नहीं, उदाहरण चाहिए।

और ...

अगर आप यह लेख पढ़ रहे हैं और आपको लगता है कि आप बहुत गुस्सा करते हैं...

छोटी-छोटी बातों पर परेशान हो जाते हैं...अंदर से अकेलापन महसूस करते हैं...तो याद रखिए—

  • आप कमजोर नहीं हैं।
  • आप इंसान हैं।
  • और इंसान कभी-कभी थक जाता है।
  • थोड़ा रुकिए।
  • अपने परिवार से बात कीजिए।
  • प्रकृति के बीच जाइए।
  • योग कीजिए।
  • अपने शरीर को अच्छा भोजन दीजिए।

और सबसे जरूरी—

  • अपने मन के दर्द को छुपाइए मत।
  • क्योंकि गुस्से में लिया गया एक फैसला जिंदगी भर का पछतावा बन सकता है।
  • लेकिन धैर्य का एक पल...
  • एक परिवार बचा सकता है।
  • एक रिश्ता बचा सकता है।
  • और शायद... एक जिंदगी भी बचा सकता है।

याद रखिए...

"आज समाज को तेज इंटरनेट नहीं, शांत मन चाहिए, तेज दिमाग नहीं, संवेदनशील हृदय चाहिए, और सफल इंसान नहीं, अच्छे इंसान चाहिए।"

और अंत में... बस इतना याद रखिए

जिंदगी बहुत कीमती है।

एक सीट के लिए...एक गाड़ी के हल्के से टकरा जाने पर...
पानी की बाल्टी या स्विमिंग पूल में हुए किसी मजाक पर...
एक छोटी सी बहस पर...एक गलत शब्द पर...
या किसी के अहंकार को ठेस लग जाने पर...

अगर आपका गुस्सा आपसे आपकी इंसानियत छीन रहा है, तो उस क्षण रुक जाइए।

याद रखिए...

  • बस या ट्रेन में सीट न मिलने से जिंदगी खत्म नहीं हो जाती।
  • सड़क पर किसी की गलती से आपकी कार या बाइक में हल्की खरोंच आ जाने से दुनिया खत्म नहीं हो जाती।
  • किसी के मजाक से आपका सम्मान छोटा नहीं हो जाता।

लेकिन गुस्से के एक पल में लिया गया गलत फैसला कई जिंदगियां बर्बाद कर सकता है।

क्योंकि जब किसी एक व्यक्ति की जान जाती है, तो केवल एक इंसान नहीं मरता...

  • उसके साथ एक माँ का बेटा चला जाता है।
  • एक पत्नी का सहारा टूट जाता है।
  • बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाता है।
  • किसी बहन का भाई चला जाता है।
  • किसी बूढ़े माँ-बाप की पूरी दुनिया उजड़ जाती है।

और कभी-कभी...

जेल की सलाखों के पीछे एक और परिवार भी धीरे-धीरे जीते-जी मरने लगता है।

इसलिए जब भी गुस्सा आए...

  • अपने बारे में सोचिए।
  • अपने बच्चों के बारे में सोचिए।
  • अपने माता-पिता के बारे में सोचिए।

और उतना ही जरूरी...

  • उस इंसान के परिवार के बारे में भी सोचिए, जो आपके सामने खड़ा है।
  • क्योंकि उसके घर में भी कोई माँ उसका इंतजार कर रही होगी।
  • कोई पत्नी उसकी राह देख रही होगी।
  • कोई बच्चा उसे "पापा" कहकर गले लगाने के लिए बैठा होगा।
  • जरा सी बात पर अपनी और किसी दूसरे की पूरी दुनिया मत उजाड़िए।
  • कुछ बातें जीतने के लिए नहीं, छोड़ देने के लिए होती हैं।
  • कुछ लोगों को जवाब देने से ज्यादा जरूरी उन्हें नजरअंदाज करना होता है।

कुछ बहसें हार जाना, जिंदगी की सबसे बड़ी जीत होती है।

याद रखिए—

जिंदगी ईश्वर की दी हुई सबसे अनमोल धरोहर है।

इसे बचाइए, अपने लिए भी... और दूसरों के लिए भी।

क्योंकि दुनिया को आज गुस्से वाले इंसानों की नहीं, धैर्यवान, संवेदनशील और अच्छे इंसानों की जरूरत है।

एक पल का धैर्य... कई जिंदगियां बचा सकता है।

– Rishi K Sharma
Ayurveda and Lifestyle Educator

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Frequently Asked Questions

आयुर्वेद में पित्त दोष और रजोगुण की अधिकता को क्रोध, चिड़चिड़ापन और मानसिक अशांति से जोड़ा जाता है।
नियमित योग और प्राणायाम तनाव को कम करने, मन को शांत रखने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और नाड़ी शोधन प्राणायाम मानसिक तनाव और बेचैनी को कम करने में सहायक माने जाते हैं।
सात्विक भोजन शरीर के साथ-साथ मन को भी स्थिर और शांत रखने में मदद कर सकता है। आयुर्वेद में इसे मानसिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
हाँ, अपर्याप्त नींद व्यक्ति की सहनशीलता, ध्यान और भावनात्मक नियंत्रण को प्रभावित कर सकती है।
स्वस्थ दिनचर्या, योग, नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, परिवार के साथ समय और सीमित स्क्रीन टाइम मददगार हो सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए दवाइयों के साथ-साथ जीवनशैली, नींद, भोजन, योग, सामाजिक सहयोग और सकारात्मक सोच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भावनात्मक सहयोग और स्वस्थ रिश्ते मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नियमित ध्यान एकाग्रता बढ़ाने, तनाव कम करने और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
हाँ, आयुर्वेद आधुनिक जीवन का विरोध नहीं करता, बल्कि संतुलित दिनचर्या, उचित आहार और स्वस्थ आदतों के माध्यम से बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
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Rishi K Sharma
Rishi K Sharma
Ayurved & Lifestyle Educator · 15+ Years Experience

Rishi K Sharma is a highly experienced Ayurved & Lifestyle Educator. He focuses on transforming your complete lifestyle through natural, practical Ayurvedic approaches that have helped 10,000+ patients achieve lasting wellness.